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जिंदगी बदलने वाले 4 समझौते | The Four Agreements Book Summary in Hindi

हेल्लो दोस्तों आज हम इस पोस्ट में बात करेंगे द फोर एग्रीमेंट्स किताब की जो आपको सिखाएगी की कैसे आप अपने दुखों और सामाज की बनाई गई सीमाओं को तोड़कर एक नई ज़िंदगी की शुरवात कर सकते हैं और अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जी सकते हैं। और इसको पढ़ने के बाद आपके अंदर का डर “सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग” ख़त्म हो जायेगा। तो चलिए शुरू करते हैं। The Four Agreements Book Summary in Hindi

Book Summary :- The Four Agreements Written By Don Miguel and Janet Mills

The Four Agreements Book Summary in Hindi

द फोर एग्रीमेंट्स में हम देखते हैं कि किस तरह से समाज हमें सीमाओं में रहना सिखाता है, यह किताब हमें बताती है की कैसे यह समाज हमें वह बना देता है जो हम नहीं हैं, इस किताब की मदद से हम जानेंगे कि किस तरह हम आजाद देश में रहकर भी समाज की बनाई गई सीमाओं में रहते हैं और अपनी जिंदगी को कभी अपने हिसाब से नहीं जी पाते है।

यह बुक समरी किसके लिए हैं?

यह बुक समरी सभी लोगो के लिए नहीं हैं यह सिर्फ उन लोगों के लिए हैं जो आजादी का सही मतलब जानना चाहते हैं। और उन लोगों के लिए जो इस ज़िंदगी को अपने हिसाब से जीना चाहते हैं दुसरो के हिसाब के नहीं, और उन लोगों के लिए हैं जो अपनी ज़िंदगी बदलना चाहते हैं और नई ज़िंदगी के तरफ कदम बढ़ाना चाहते हैं । और अगर अब आपको लगता हैं की ये आपके लिए हैं तो चलिए अब आगे पढ़ते हैं।

यह किताब आपको क्यों जरूर पढ़नी चाहिए?

क्या आपने कभी या महसूस किया है कि आप किसी कैद में रह रहे हो ? क्या आप कभी कभी कुछ अलग काम करना चाहते हैं लेकिन लोग क्या कहेंगे सोच कर रुक जाते हैं? क्या आप समाज की जरूरतों के हिसाब से अपनी जिंदगी जीते हैं?

अगर ऊपर के सभी सवालों का जवाब हां है तो यह किताब आपके लिए ही लिखी गई है। इस किताब में हम देखेंगे कि किस तरह हमें बचपन में ही हदो में रहना सिखाया जाता है, और बड़े होने पर भी हदो में ही रहते हैं और कभी अपनी असली ताकत को नहीं पहचान पाते।

इस किताब की मदद से हम देखेंगे कि कैसे हम अपने दुखों और समाज की बनाई गई सीमाओं को तोड़कर एक नई जिंदगी की शुरुआत कर सकते हैं और अपनी जिंदगी को अपने हिसाब से जी सकते हैं। और किस तरह हम आजाद देश मे रहकर भी आजाद नहीं है।

यह समाज हमें नियमों के हिसाब से जीना सिखा देता है।

क्या आपको याद है की बचपन में जब आपने अपने पेरेंट्स की बात मानी थी तब आपको शाबाशी मिली थी? क्या आपको याद है कि जब आपने उनकी बात मानने से इनकार किया था तो आपको सजा मिली थी?

हम में से ज्यादातर लोगों के साथ ऐसा ही होता है। हमें बचपन से ही बेडियों में जकड़ कर रखा जाता है, और बताया जाता है कि क्या करना है और क्या नहीं करना है। धीरे-धीरे यह सभी बातें हमारे दिमाग में कुछ इस तरह से बैठ जाती हैं कि बड़े होने पर भी हम उन बातों को मानते रहते हैं।

हम में से हर किसी को इनाम और तारीफें पसंद है। बचपन में जब भी हम कोई अच्छा काम करते थे तब हमें यह दोनों चीजें मिलती थी इसके साथ ही सजा से डर सभी को लगता है। इसलिए हम वह काम करने से डरते थे जिसके लिए हमें मना किया जाता था।

इन सभी बातों का नतीजा यह निकला की हमें वो बना दिया गया जो हम नहीं हैं, हमें एक सांचे में ढाल दिया गया और समय के साथ हम उसी आकार के हो गए। अब जब हम बड़े हो गए हैं हमें कोई कंट्रोल नहीं कर रहा है तभ भी हम खुद ही उस आकार को बनाए रखने की कोशिश करते हैं।

हमने अपने लिए यह नियम नहीं चुने थे यह नियम हम पर जबरदस्ती लागू किए गए थे। बचपन से बड़े होने के सफर में हमें ना जाने कितनी तरह से कैद करके रखा गया था। अब वक्त आ गया है की हम उस कैद से आजाद हो जाए।

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आपके शब्द आपको खुद पर और दूसरों पर जीत हासिल करने में मदद करते हैं।

शब्दों का हमारी जिंदगी में बहुत बड़ा महत्व होता है। अगर हम इसका सही इस्तेमाल करें तो यह हमें काफी हद तक फायदा पहुंचा सकता है। साथ ही में इसका गलत इस्तेमाल हमारे आत्मविश्वास को तोड़कर हमें कमजोर बना सकता है।

उदाहरण के लिए आप अपने आपको आईने में देखकर यह सोचे कि आप बदसूरत लगते हैं तो आप अपना आत्मविश्वास खो देंगे और लोगों के सामने आने जाने से उनसे बात करने में संकोच करेंगे।

शब्दों की ताकत शरीर की ताकत से ज्यादा होती है। आप अपनी ताकत से लोगों पर बाहर से राज कर सकते हैं लेकिन अपने शब्दों की ताकत का इस्तेमाल कर आप लोगों के मन पर राज कर सकते हैं, अच्छे शब्दों से आपको इज्जत मिलेगी और इसके इस्तेमाल से आप लोगों से अपनी बात मनवा भी सकते हैं। The Four Agreements Book Summary in Hindi

आप शब्दों के इस्तेमाल से किसी और का भी हौसला बढ़ा सकते हैं। अगर आप किसी से कहें कि वह अपना काम बहुत अच्छे से कर सकता है और उसे अपना काम मेहनत से करना चाहिए तो वह मेहनत जरूर करेगा। लेकिन अगर आप उसे कहे कि वह इस काम को कभी ढंग से नहीं कर पाएगा तो उसका भी आत्मविश्वास टूट जाएगा और वो वाकई में अपना काम कभी सही से नहीं कर पाएगा।

इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने शब्दों का इस्तेमाल सही तरह से करें। आप इसके इस्तेमाल से सब के दिलों पर राज कर सकते हैं और साथ ही अपना आत्मविश्वास भी बढ़ा सकते हैं।

आप अपने आप को पहचानिए और खुद को दूसरों के स्केल से नापना बंद कीजिए।

हम अक्सर अपने आप को उस तरह से देखने लगते हैं जैसा लोग हमें मानते हैं। जैसे अगर किसी ने आप से स्कूल के दिनों में कहा होगा कि आप पढ़ने में बिल्कुल अच्छे नहीं है तो आपके अंदर यह भावना आ गई होगी क्या आप स्मार्ट नहीं है। ठीक उसी तरह अगर आप से किसी ने कहा होता कि आप बहुत स्मार्ट हैं कि आप बहुत स्मार्ट हैं आप अपने आपको स्मार्ट समझने लगते।

हम हमेशा ही अपने आप को दूसरों की जरूरतों के हिसाब से ढ।लने की कोशिश करते हैं । अगर लोग हमसे कहने लगे कि हम मोटे हो गए हैं तो हम अपना वजन कम करने में लग जाते हैं। लेकिन क्या यह जिंदगी आपको दूसरों की शर्तों पर जीने के लिए मिली थी ? क्या आपने पैदा होने के बाद कोई एग्रीमेंट साइन किया था जिसमें आपने यह कुबूल किया था कि आप हमेशा दूसरों के हिसाब से ही जिएंगे?

अब वक्त आ गया है कि आप अपने बारे में जाने और खुद को दूसरों की स्केल से नापना बंद करें। अगर कोई आप पर एक उंगली उठाता है तो आप देखिए की तीन उंगलियां उसकी तरफ है। इसका मतलब वह आपके बारे में कम और अपने बारे में ज्यादा बता रहा है।

लोग अपनी सोच अपने मूड के हिसाब से आपके बारे में अच्छी या बुरी बातें करेंगे। अगर आपके दोस्त का मूड अच्छा है तो वह आपकी तारीफ करेगा लेकिन अगर उसका मूड खराब है तो आप में बुराइयां निकालने लगेगा। ठीक उसी तरह अगर कोई आपसे कहता है कि आप यह काम नहीं कर पाएंगे तो यह उसका मानना है कि आप नहीं कर पाएंगे तो जरूरी नहीं है कि जो वह मानता है वह ही सच हो। तो आप अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जीना सीखिए।

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अनुमान लगाना नुकसानदायक साबित हो सकता है।

हमारा दिमाग किसी भी काम को करने के लिए हमेशा कोई आसान सा रास्ता खोजता रहता है। इसलिए जब हमें कोई बात समझ में नहीं आ रही होती तो हम अनुमान लगा लेते हैं किस वजह से ऐसा हो सकता है। अनुमान लगा लेने से हमें हमारे सवाल का एक संभव जवाब मिल जाता है जिससे हमें आगे सोचने की जरूरत नहीं पड़ती।

लेकिन क्या आपने कभी अनुमान लगाने से होने वाली परेशानियां के बारे में सोचा है। जैसा कि पहले ही कहा गया है कि यह जरूरी नहीं है कि लोगों का मानना हमेशा सच ही हो। अगर आप किसी चीज का अंदाजा लगा रहे हैं तो इसकी बहुत बड़ी संभावना है कि आप गलत हैं।

उदाहरण के लिए अगर आपका दोस्त आप की तरफ ध्यान ना दें और आप अनुमान लगा ले कि वह आपसे नाराज है तो यह बिल्कुल गलत होगा। अनुमान लगाने से अच्छा है कि आप उससे पूछें की ओ ऐसा क्यों कर रहा है। सवाल पूछने से हमारी बातें साफ हो जाती हैं और आगे चलकर परेशानियां नहीं झेलनी पड़ती है।

अगर आप अंदाजा लगाकर कोई काम करते हैं तो आप अपनी सोच को सच्चाई मान लेते हैं। आपको लगने लगता है कि आप जो सोच रहे हैं वही सच है और जब आप गलत साबित होते हैं तब आपको बुरा लगता है। अगर आप अंदाजा लगा ले कि आप कोई काम कर लेंगे आप बिना तैयारी के ही उसमें घुस जाएंगे और हारने पर बुरा महसूस करेंगे।

अनुमान लगाना रिश्तो में दरार डाल सकता है और बनते काम भी बिगाड़ सकता है। इसलिए यह जरूरी है की आप अनुमान लगाने से बचें। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप तब तक सवाल करें जब तक आपको सारी बात समझ में ना आ जाए।

आप हर काम को अच्छे से अच्छे तरीके से करने की कोशिश कीजिए।

हर काम में अपना पूरा जोर लगाना हमेशा अच्छा होता है। अब चाहे वह आपकी पढ़ाई हो या फिर आपकी नौकरी। अगर आप हमेशा अपने काम को अच्छे से अच्छे तरीके से करने की कोशिश करेंगे तो हारने पर भी आप खुद को दोष नहीं देंगे। लेकिन अगर आपने पूरी कोशिश नहीं की तो हार जाने पर आप हमेशा अपने आप को दोष देते रहेंगे कि अगर आपने उस समय मेहनत की होती तो शायद आप आज सफल होते हैं।

ऐसा हो सकता है आप किसी दिन अपना काम बहुत अच्छे से कर ले जाएं जबकि कभी-कभी आप अपने काम में ठीक से मन भी नहीं लगा पाए। शायद सुबह काम करने पर आप ज्यादा अच्छा महसूस करें और रात में काम करने पर थका हुआ महसूस करें लेकिन हालात चाहे जो भी हो आप हमेशा अपना पूरा जोर लगाते रहिए। The Four Agreements Book Summary in Hindi

क्या हो अगर आपका काम करने का मन बिल्कुल ना करता हो? अक्सर लोगों को रोज सुबह उठने पर यह जानकर बिल्कुल खुशी नहीं होती कि आज उन्हें काम पर जाना है। ऐसे में हम क्या कर करें जिससे हमारा काम करने का मन करे?

अगर आप किसी बाहरी दबाव या जरूरत की वजह से काम कर रहे हैं तो आपका काम करने का मन नहीं करेगा। आजकल स्कूल जाने वाले बच्चों का पढ़ाई में मन इसलिए नहीं लगता क्योंकि वे बाहरी दबाव की वजह से पढ़ते हैं। वह इसलिए पढ़ते हैं ताकि उनके मार्क्स अच्छे आए।

इन्हीं चीजों की वजह से आपका काम करने का मन नहीं करता। आप वो काम कीजिए जो आपको अच्छा लगता हो। अगर आप अपने काम से प्यार करेंगे आपको अपना काम बोझ नहीं लगेगा। इस तरह से काम करने पर आपका काम में मन भी लगेगा और आप हमेशा ही उसे अच्छे से कर पाएंगे।

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अपनी नई जिंदगी की शुरुआत पुरानी जिंदगी को छोड़कर कीजिए।

अब दिए गए तीन रास्तों को अपनाकर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर सकते हैं।

1- अपने सपनों को पहचानिए सबसे पहले आप यह देखिए कि आपके सपने क्या है और क्यों आपने उन सपनों को अब तक पूरा नहीं किया। आप अपनी जिंदगी को अपने सपनों की जिंदगी के हिसाब से जीना शुरू कीजिए और अगर आपके रास्ते में कोई ऐसी बात आती है जो आपको बचपन में सिखाई गई थी तो आप उसको छोड़ कर आगे बढ़ना सीखिए। आप उन चीजों को पहचानिए जो आपके दुख का कारण है और फिर उनसे धीरे-धीरे छुटकारा पाइए।

2- दूसरों को माफ करना सीखिए आपके दुख का कारण यह भी हो सकता है कि आपका किसी से झगड़ा हुआ हो या फिर किसी ने आप को बुरा भला कहा हो। आप उसकी कही हुई बातों को अपने साथ लिए घूमते रहते हैं जिसे आप का दुख हमेशा बढ़ता रहता है।

आप दूसरों को माफ करना सीखिए। अगर आपको किसी बात का पछतावा हो रहा है तो आप खुद को माफ करना सीखिए। आप जब तक लोगों को माफ करना नहीं सीखेंगे तब तक आप पुरानी यादों में घूमते रहेंगे और आपके अंदर नकारात्मकता आने लगेगी। The Four Agreements Book Summary in Hindi

3- हर पल का मजा लेना सीखिए आप हर दिन को कुछ इस तरह से व्यतीत करिए जैसे वह आप का आखरी दिन हो। ऐसा करने से आप बस उन चीजों पर ध्यान देंगे जिनसे आपको खुशी मिलेगी और आप दुख देने वाली चीजों को बगल में रखना सीख जाएंगे। कोई भी अपनी जिंदगी का आखरी दिन तनाव में जीकर नहीं बिताना चाहेगा। हर दिन को आखिरी दिन समझने से आपको जिंदगी जीने का तरीका आ जाएगा।

सारांश

हमारे बचपन से हम अपनी जिंदगी को दूसरों के हिसाब से जीते आ रहे हैं। हमारी खुशी और आजादी से ज्यादा जरूरी है “लोग क्या सोचेंगे” । अगर आप सच में अपनी जिंदगी सुकून से जीना चाहते हैं तो आपको समाज की सीमाओं को तोड़ना होगा जिसे आप अपनी असली ताकत को पहचान सके और अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जी सके।

अपनी बेड़ियों को तोड़ना शुरू कीजिए। बहुत सारे लोग न जाने कितनी बेड़ियों से बधे होते हैं । अब वक्त आ गया है कि आप उनमें से एक को तोड़ दें। अगर आप कहा गया है कि आपको रात में कहीं बाहर नहीं जाना है तो आप 1 दिन बस ऐसे ही बाहर चले जाइए। आप अपने रास्ते की रुकावटो को तोड़कर अपने आप को आजाद कीजिए।

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हेलो दोस्तों इस पोस्ट को पूरा पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यबाद मुझे पूरा आशा है की आपको इस पोस्ट से कुछ नया सीखने को मिला होगा और इस पोस्ट का समरी आपको अच्छा लगा होगा तो अगर आपको ये पोस्ट अच्छा लगा हो और कुछ नया सीखने को मिला हो तो अपने दोस्तों और परिवारों से साथ जरूर शेयर करें।

THANK YOU💖

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