bulleh shah poem

मिट्टी कुदम करंदी यार – बुल्ले शाह की सूफ़ी दृष्टि | Bulleh shah Poem

सूफ़ी संत बुल्ले शाह की यह प्रसिद्ध काफ़ी हमें जीवन की अस्थिरता, अहंकार की निरर्थकता और मानव समानता का गहरा संदेश देती है। “मिट्टी कुदम करंदी यार” केवल एक कविता नहीं, बल्कि अस्तित्व का दार्शनिक उद्घाटन है — जो बताती है कि अंततः सब कुछ मिट्टी है और मिट्टी में ही मिल जाना है। नीचे […]

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