gautam buddha moral stories in hindi

बीता हुआ कल वापस नहीं आता | Gautam Buddha Moral Stories in Hindi

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जीवन में हमें अक्सर अपनी गलतियों और बीते हुए कार्यों का पछतावा होता है। हम खुद को सोचते हैं कि क्या होता अगर हमने वह कार्य नहीं किया होता या उस गलती को सुधार दिया होता। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि बीता हुआ कल वापस लौटकर नहीं आता है? यहां हम एक छोटी लेकिन गहराई से सोचने वाली महात्मा बुद्ध की इस कहानी के माध्यम से देखेंगे कि हमें अपनी भूलों को भूलकर आगे बढ़ना चाहिए।

कहानी: बीता हुआ कल लौटकर नहीं आता!

Gautam Buddha’s Moral Story in Hindi

महात्मा बुद्ध एक गांव में प्रवचन सुना रहे थे, उन्होंने पास हुए लोगो के समीप अपनी मधुर वाणी से सभी को सम्भोदित करते हुए बताया की हर किसी मनुष्य को धरती माँ की तरह सहनशील तथा क्षमाशील होना चाहिए।

क्रोध मानव का ऐसा शत्रु है जो दुसरो को तो हानि पहुँचायेगा साथ में खुद भी उससे नहीं बच पायेगा इसलिए क्रोध, ईर्ष्या मानव की सबसे बड़े शत्रु है।

सभा में सभी लोग शांति से उनकी बात को ध्यान पूर्वक सुन रहे थे, तभी वहाँ उस सभा में एक अति क्रोधी व्यक्ति भी उपस्थित था।

वह पहले तो उनकी बात सुनता रहा फिर वह अचानक महात्मा जी से क्रोधित होकर बोला ” बोलते समय उसका आंखे खून के सामान लाल हो रही थी।

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उसने बोला की तुम ढोंगी हो यहाँ बैठकर लोगो को बेवकूफ बना रहे हो, यह जो भी तुम कुछ कह रहे हो, ना इसको सचमुच करना बहुत मुश्किल है, समझे ” तुम्हारी इन बातो का कोई मतलब नहीं हे,
यह सब बातें कोई मायने नहीं रखती असल जिंदगी मे, कहानी सुनाना बंद करो धूर्त महात्मा और जहा सेआये हो वही चले जाओ।

ऐसे कठोर वचन सुनकर भी महात्मा जी ने उस क्रोधी पुरुष का कोई विरोध नहीं किया, और न ही उसकी बातो पर कोई भी प्रतिक्रया दी, वह शांत रहे और अपना काम करते रहे।

जिससे वह पुरुष और भी क्रोधित हो गया उसकी समझ नहीं आया वह क्या करे ?
तब उस पुरुष ने महात्मा जी के मुँह पर थूक कर चला गया।

“अगले दिन जब उस व्यक्ति का क्रोध शांत हुआ,” और उसे अपनी गलती का पछतावा हुआ, तब वह आत्मग्लानि में जलने लगा।

“और फिर उसने सोचा की उस महात्मा से मुझे माफ़ी मांगनी चाहिए”, वह महात्मा जी की खोज में उसी स्थान पर गया, जहा महात्मा जी कल प्रवचन दे रहे थे।

लेकिन महात्मा जी वहाँ कहाँ मिलने वाले थे, वह तो अपने शिष्यों के साथ अन्य किसी गांव की यात्रा पर निकल पड़े।
वह पुरुष सब लोगो से महात्मा जी के बारे में पूछता – पूछता उस स्थान पर पहुंच गया, जहा की महात्मा जी प्रवचन कर रहे थे।

तब उस पुरुष को महात्मा जी के शिष्यों ने उसे उनके पास जाने से रोका, लेकिन महात्मा जी ने अपने शिष्यों को आदेश दिया की आने दे उस पुरुष को “

तब वह पुरुष महात्मा जी के चरणों पर गिर गया उनसे बोला मुझे क्षमा कीजिये महाराज “
उसने महात्मा जी से पूछा क्या आप भूल गए हो की में वही जिसने कल आपका इतना अपमान किया था में अपने दुष्ट कृत्य की आपसे माफ़ी मांगता हूँ।

तब महात्मा जी ने बड़े शालीनता से उस पुरुष से बोले की कौन सी बात, तब उस पुरुष ने बड़ी हैरानी से महात्मा जी की और देखा “

महात्मा जी बोले की में तो बीती बातें वही छोड़ आया क्योकि बीता हुआ कल कभी वापस लौटकर नहीं आता इसलिए बीती हुए बातों की वजह से आज और अपना आने वाला कल नहीं बिगड़ना चाहिए।

जो हो गया सो हो गया तुम्हे अपनी भूल का एहसास हुआ यही सबसे बड़ी बात है, तुम अपनी गलती को मान लिए सो तुम अब निर्मल हो गए हो इसलिए कोई भी ग्लानि अपने मन में नहीं रखो।
अपने आने वाले कल के बारे में विचार करो और उसे सुधारने का प्रयास करो।

महात्मा जी की बात सुनकर उस पुरुष के मन का भार हल्का हो गया, और उसने महात्मा जी के चरणों को पकड़कर कहा,”

आज से में अपने क्रोध का त्याग करता हूँ और धैर्यबान और क्षमाशील होने का प्राण आज से लेता हूँ।

निष्कर्ष:

तो दोस्तों हमें इस कहानी से यह प्रेरणा मिलती है की यदि अपने बीते हुए कल की गलती को लेकर हमे वर्तमान में उसका पछतावा न कर उस गलती को हमे अपने भविष्य में कभी नहीं करना चाहिए, क्योकि दोस्तों बीता हुआ कल कभी लौटकर वापस नहीं आता।

तो अगर आपको महात्मा गौतम बुद्ध की इस कहानी से कुछ सीखने को मिला हो, तो अपने दोस्तों के साथ इसे जरूर शेयर करें।

Thanks for Reading!💖

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