बुल्ले शाह हिंदी अर्थ

कोई रंग काला कोई पीला – बुल्ले शाह कविता”

कोई रंग काला, कोई पीला – बुल्ले शाह की सूफ़ी काफ़ी | Bulleh Shah ki Kavita

🌿 कविता – बुल्ले शाह कोई रंग काला, कोई पीला,कोई लाल गुलाबी करदा।बुल्ले शाह मुरशिद वाला,किसे किसे नूं चढ़दा। कोई सजदा करे मस्जिद अंदर,कोई मंदिर जाके सर धरे।कोई गंगा विच डुबकी लावे,कोई तीर्थां वाल धरे।बुल्ले शाह मुरशिद वाला,किसे किसे नूं चढ़दा। कोई माला फेरत जपदा,कोई तस्बीह हाथ विच धरदा।कोई वेद कुरान पढ़दा,कोई फ़िक़्ह फतवा करदा।बुल्ले […]

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bulleh shah poem

मिट्टी कुदम करंदी यार – बुल्ले शाह की सूफ़ी दृष्टि | Bulleh shah Poem

सूफ़ी संत बुल्ले शाह की यह प्रसिद्ध काफ़ी हमें जीवन की अस्थिरता, अहंकार की निरर्थकता और मानव समानता का गहरा संदेश देती है। “मिट्टी कुदम करंदी यार” केवल एक कविता नहीं, बल्कि अस्तित्व का दार्शनिक उद्घाटन है — जो बताती है कि अंततः सब कुछ मिट्टी है और मिट्टी में ही मिल जाना है। नीचे

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